चीनी सामान का बहिष्कार- गुजरात की 150 मैन्युफैक्चरर्स ने चीन के खिलाफ छेड़ी जंग, ये कंपनियां देगी चीनी प्रोडक्ट्स को टक्कर

150 manufacturers from Gujarat waged war against China, these companies compete with Chinese products

भारत-चीन

भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा तनाव और मोदी सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे को देखते हुए चायनीज प्रोडक्ट के बॉयकट की मांग तेज हो रही है.सरकारी भी अपनी नीतियों को दोबारा चेक कर रही है ताकि चीन से आने वाले किसी भी सामान पर रोक लगाया जा सके.वही ई-कॉमर्स साइट्स पर सामान की लिस्टिंग के साथ उसकी मैनुफैक्चरिंग ओरिजन बताना जरूरी कर दिया गया है. खैर ये तो बात है सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की लेकिन बॉयकट अब आम आदमी और सरकार के अलावा बिजनेस ग्रुप्स में भी पहुंच गया है. वहीं दूसरी और गुजरात  के मोरबी  शहर के करीब 150 मैन्युफैक्चरर्स चीनी प्रोडक्ट्स  के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं. देश में चीन कई प्लास्टिक वस्तुओं के अलावा इलेक्ट्रिकल गुड्स और अन्य पार्ट्स आयात किए जाते हैं.

साथ ही 300 से ज्यादा कंपनियां हैं यहां- देश का गुजरात राज्य एक ऐसा राज्य है जो उद्योग के लिए पहचाना जाता है. यहां पर कपड़ा, इलेक्ट्रिकल गुड्स, टैक्टाइल इत्यादि के क्षेत्र में कई बड़ी कम्पनियां हैं. गुजरात का मोरबी, सिरेमिक की मैन्युफैक्चरिंग के लिए देशभर में जानी जाती है. यहां घड़ियों के साथ प्लास्टिक गुड्स और इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स की करीब 300 से ज्यादा कंपनियां हैं.

गुजरात की 150 कंपनियों ने छेड़ी जंग-

दरअसल गुजरात के मोरबी शहर की लगभग 150 मैन्युफैक्चर्स चीनी प्रोडक्ट्स के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं, उनके खिलाफ हुंकार भरी है. भारत में चीन से कच्चे माल का आयात कर देश में उसका प्रोडक्शन किया जाता है. मोरबी के इन मैन्युफैक्चरर्स ने कच्चे माल को वियतनाम, कम्बोडिया, ताइवान जैसे देशों से इंपोर्ट करने का सोचा है. इनका कहना है कि वो धीरे-धीरे कच्चा माल भी मोरबी में ही बनाना चाहते हैं.

तैयारी की शुरू

उद्योग और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने वाला विभाग DPIIT  की ओर से चीन में बनने वाले निम्न-गुणवत्ता वाले आयातों की लिस्ट तैयार करने के बाद मोरबी के इन उत्पादकों ने एलजी, सैमसंग और सिमेंस जैसी वाइट गुड्स बनाने वाली कम्पनियों के साथ व्यापार सम्बन्धित बात करना शुरू कर दिया है. जिससे की चीन से आयात होने वाला कच्चा मालमोरबी के उत्पादक उन्हें दे सकें.

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